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तंत्र का 'कमाल': केन नदी में तीन दिन से तैर रही लाश, पुलिसें एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रही

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  तंत्र का 'कमाल': केन नदी में तीन दिन से तैर रही लाश, पुलिसें एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रही

रवीन्द्र व्यास 

छतरपुर। केन नदी के टोरियाटेक, मडला रिपटा  के पास तीन दिनों से एक अज्ञात पुरुष की लाश तैर रही है। लेकिन नदी से लाश निकालने की बजाय, छतरपुर और पन्ना जिले की पुलिसें क्षेत्राधिकार के नाम पर एक-दूसरे पर उंगली उठा रही हैं। छतरपुर पुलिस का दावा लाश पन्ना के क्षेत्र में है, पन्ना पुलिस का नहीं, यह छतरपुर की जिम्मेदारी है। नतीजा? लाश नदी में सड़ रही है, और तंत्र का कमाल चमक रहा है!यह घटना बुंदेलखंड के उस प्रशासनिक अर्द्धसत्य को उजागर करती है, जहां सीमाओं की जिद्दी लकीरें इंसानी जिंदगियों से ऊपर हो जाती हैं। केन नदी, जो पन्ना टाइगर रिजर्व से होकर बहती है और बुंदेलखंड की जीवनरेखा है, आज प्रदूषण और अवैध शवदाह की शिकार हो चुकी है। राज्य पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में ही मध्य प्रदेश की नदियों में 150 से अधिक ऐसी अज्ञात लाशें मिलीं, जिनमें से 40% पर इसी तरह का 'पेंच' फंसा। लेकिन छतरपुर-पन्ना बॉर्डर पर यह तमाशा कोई नई बात नहीं—पिछले साल भी यही नौबत आई थी, जब एक लाश को सात दिन तक नदी में ही छोड़ दिया गया था।क्या यह 'बेहतर व्यवस्था' है? जहां एसपी और कलेक्टर फोन पर बहस कर रहे हैं, वहीं स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण डर के मारे नाव तक नहीं चला रहे। न कोई जॉइंट ऑपरेशन, न ड्रोन सर्वे, न एसडीआरएफ की तैनाती। अगर इतनी ही क्षेत्रीय गर्व की होड़ है, तो कम से कम एक संयुक्त कमेटी बना लीजिए! वरना, अगली बार कोई बच्चा या पर्यटक नदी में फंस जाए, तो तंत्र का कमाल फिर चलेगा ,उंगली उठाना, लेकिन हाथ न बढ़ाना।बुंदेलखंड को ऐसी नौटंकी की जरूरत नहीं। मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप कर सीमा-विवाद निपटाने के लिए स्थायी प्रोटोकॉल जारी करना चाहिए। तब तक, केन नदी चुपचाप गवाह बनी रहेगी—तंत्र की नाकामी का।

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