भारत-विरोधी और पाकिस्तान समर्थक पोस्टर लगाने से जुड़ेतमिलनाडु के तिरुपुर से छह बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार
दिल्ली// पुलिस ने तमिलनाडु के तिरुपुर से छह बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली में भारत-विरोधी और पाकिस्तान समर्थक पोस्टर लगाने से जुड़े हैं। ये लोग फर्जी दस्तावेजों के साथ कपड़ा उद्योग में मजदूरी कर रहे थे। अब तक की जानकारी से पता चलता है कि यह एक बड़े मॉड्यूल का हिस्सा हो सकता है।
गिरफ्तारी का विवरण
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20-21 फरवरी 2026 को तिरुपुर पहुंचकर मिजानुर रहमान (33), मोहम्मद शफात (35), उमर (32), मोहम्मद लितान (40), मोहम्मद शाहिद (40) और मोहम्मद उज्जवल (29) को हिरासत में लिया। उनके पास से 8-12 मोबाइल फोन, 16 सिम कार्ड और उत्तर भारतीय पतों वाले फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए। इन्हें मेडिकल जांच और मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के बाद ट्रेन से दिल्ली ले जाया गया।
दिल्ली पोस्टर कांड से संबंध
7-8 फरवरी 2026 को दिल्ली के कश्मीरी गेट, जनपथ मेट्रो स्टेशन और सुप्रीम कोर्ट जैसे स्थानों पर 'फ्री कश्मीर', पाकिस्तान समर्थक और गाजा से जुड़े भारत-विरोधी पोस्टर लगे थे। दिल्ली में गिरफ्तार दो लोगों के फोन से इन छह के नंबर मिले, जो लश्कर-ए-तैयबा जैसे हैंडलर से जुड़े बताए जा रहे हैं। कोलकाता से दो अन्य भी पकड़े गए।
तिरुपुर में बांग्लादेशी प्रवासी
तिरुपुर कपड़ा उद्योग में 8.5 लाख श्रमिक हैं, जिनमें 40% प्रवासी (मुख्यतः उत्तर भारत से)। पिछले डेढ़ साल में स्थानीय पुलिस ने 200+ बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर डिपोर्ट किया; 2025 में पश्चिमी जिलों में 103 पकड़े गए। जनवरी 2025 में ही 83 गिरफ्तार हुए, ज्यादातर फर्जी दस्तावेजों से छोटी कंपनियों में काम करते। मद्रास HC ने 28 को डिपोर्ट करने का आदेश दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने DMK सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया, पूछा कि राज्य ATS क्या कर रहा था। पुलिस ने कहा कि तिरुपुर में इनके खिलाफ स्थानीय केस नहीं था, जांच दिल्ली में जारी।
डेमोग्राफी पर प्रभाव
अवैध बांग्लादेशी प्रवासी (अनुमान 2-20 करोड़ पूरे भारत में) सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकी बदल रहे हैं, खासकर असम, दिल्ली, हैदराबाद जैसे शहरों में। तिरुपुर जैसे औद्योगिक केंद्रों में ये मजदूरी से घुसपैठ कर बसते हैं, जो आतंकी मॉड्यूल को पनाह दे सकता है। सरकार ने 2025 में हजारों डिपोर्ट किए, लेकिन पैमाना बड़ा है।









