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गोठान की ज़मीन पर पार्क या पार्क में गोठान.? आरक्षित जमीनो को खत्म करने के विकास मॉडल पर उठे सवाल.?

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गोठान की ज़मीन पर पार्क या पार्क में गोठान.? 

आरक्षित जमीनो को खत्म करने के विकास मॉडल पर उठे सवाल.?




 विकास मॉडल पार्ट -1 @ खेमराज चौरसिया (आर.टी.आई. कार्यकर्ता )

 मध्य प्रदेश //छतरपुर//महाराजपुर। विकास कार्यों के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर कभी-कभी ऐसी तस्वीर सामने लाता है, जो सरकारी दावों पर ही सवाल खड़े कर देती है। 

महाराजपुर नगर पालिका के वार्ड क्रमांक–1, धुबियारा (अकितयाउ बारिया) स्थित गोठान, जो मूलतः गायों के ठहराव के लिए निर्धारित स्थान बताया जाता है, वहाँ पार्क निर्माण के नाम पर बिना अतिक्रमण हटाए केवल बाउंड्री वॉल का कमरों का निर्माण कर दिया गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमि के एक हिस्से में पार्क बना दिया गया, जबकि पीछे का हिस्सा आज भी अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है। 

साथ ही गौरारी गली से हर्रई  गोंडवाना स्टेट का मार्ग,गौरारी से महाराजपुर मार्ग, गोठान क्षेत्र से शिवसागर तालाब के ओवरफ्लो जल निकासी मार्ग पर गेट और जाली लगाकर कथित रूप से पारंपरिक रास्ता एवं पानी निकासी का मार्ग अवरुद्ध कर दिया गया। 

इसी को लेकर क्षेत्र में नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुसमा एवं महाराजपुर मौजा की सीमा में पान बरेजा रकवा  एवं कृषि भूमि रकवा दर्ज होने के कारण राजस्व विभाग सीमांकन नहीं करता, जबकि संबंधित अभिलेख एवं नक्शे उपलब्ध बताए जाते हैं।


वहीं, नगर पालिका निर्माण कार्यों के लिए भूमि पर अपना अधिकार जताती है, लेकिन अतिक्रमण हटाने की बात आने पर राजस्व विभाग और नगर पालिका एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं।


 ऐतिहासिक शिव सागर तालाब के ओवरफ्लो भूमि इसी पार्क से होकर बस स्टैंड, शासकीय नेहरू हाई स्कूल के समीप से गुजरते हुए  लवकुशनगर–छतरपुर मार्ग से निकलता है।

( ऐतिहासिक शिव सागर तालाब के ओवरफ्लो नाला जो गोठन भूमि से हर्रई गोंडवाना स्टेट का मार्ग,गौरारी से महाराजपुर मार्ग से लवकुशनगर–छतरपुर मार्ग से निकलता है जहां पर इसकी चौड़ाई लगभग दो जरीब की राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है पर जमीनी स्तर पर में रोड पर जमीन खाली नहीं है)

 स्थानीय लोगों का आरोप है कि बहुमूल्य पान बरेजा एवं कृषि भूमि होने के कारण राजस्व विभाग पान बरेजा का सीमांकन नहीं होते बताते हैं , जबकि दूसरी ओर रकबा समाप्त होने के बाद भी भूमि की रजिस्ट्री एवं नामांतरण  तथा नगर पालिका में भवन स्वीकृतियाँ, एवं नामांतरण बिना आबादी क्षेत्र घोषित के नियमों के विपरीत जारी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।


स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि दोनों विभाग अतिक्रमण हटाने के मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


इसी बीच एक और सवाल उठ रहा है। 

जिस पार्क को बच्चों के खेलने और नागरिकों के मनोरंजन के लिए विकसित किए जाने का दावा किया गया, उसी परिसर में गायों के कंडे (उपले) बनाए और सुखाए जाते दिखाई दे रहे हैं। करोड़ों लाखों रुपये की सार्वजनिक राशि से निर्मित पार्क का वास्तविक उपयोग क्या है?

केंद्रीय मंत्री एवं स्थानीय सांसद डॉ. वीरेंद्र खटीक ने विभिन्न मंचों से क्षेत्र के विकास कार्यों का उल्लेख किया है पर यहां लगी शिलालेख में धनराशि अंकित नहीं की गई है। ऐसे में स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें इस पार्क की वर्तमान स्थिति की जानकारी है? 


यदि जानकारी है, तो क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया? और यदि जानकारी नहीं है, तो क्या वास्तविक स्थिति उनसे छिपाई गई?

यह मामला केवल एक पार्क का नहीं, बल्कि भूमि के स्वामित्व, निर्माण स्वीकृति, रखरखाव और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।


यदि यह भूमि वास्तव में गोठान के रूप में दर्ज है, तो क्या इसे विधिवत विभागीय प्रक्रिया के तहत नगर पालिका को हस्तांतरित किया गया ? यदि किया गया, तो उसका आदेश किस प्राधिकारी ने जारी किया? और यदि नहीं किया गया, तो पार्क निर्माण किस वैधानिक आधार पर हुआ?

जनता के सवाल

क्या संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड पार्क निर्माण के लिए विधिवत उपलब्ध है?

क्या गोठान भूमि का विभागीय हस्तांतरण नगर पालिका के पक्ष में किया गया था?

पार्क निर्माण की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई?

रखरखाव की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?

यदि पार्क में नियमित रूप से कंडे बनाए जा रहे हैं, तो क्या नगर पालिका ने इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई की?

क्या केंद्रीय मंत्री, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेंगे?



पार्ट -2 मैं बात करेंगे, तहसील, अनुविभागीय न्यायालय के आदेश, कलेक्टर को नगर पालिका के सीमांकन का पत्र। ऐतिहासिक शिव सागर तालाब नाला जो लगभग दो जरीब चौड़ाई का नाला अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र। एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि का विकास नाला निर्माण 4 से 6 फीट मैं कैसे हुआ निर्माण.?


 हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन से हुए विकास कार्यों और भूमि संबंधी तथ्यों की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है।

 नगर पालिका, राजस्व विभाग, जिला प्रशासन तथा सांसद, विधायक कार्यालय का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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