वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती आबाद
रवीन्द्र व्यास
मध्य प्रदेश के दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिलों की सीमाओं पर फैला प्रदेश का सबसे बड़ा वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व नौरादेही) अब बाघों का मजबूत कुनबा बना रहा है। रविवार देर रात कान्हा टाइगर रिजर्व से लाए गए एक स्वस्थ तीन साल के नर बाघ को मोहुली रेंज के आंखीखेड़ा जंगल में खुले वन क्षेत्र में सफलतापूर्वक छोड़ा गया। रेडियो कॉलर आईडी से लैस यह बाघ अब 26 से अधिक मौजूदा बाघों के बीच अपनी टेरिटरी बनाएगा।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार रिजर्व में 28 बाघ हैं, जबकि बाहरी मूवमेंट से संख्या 30 से ऊपर पहुंच चुकी है।यह नर बाघ तीन साल पहले पेंच टाइगर रिजर्व के रुखड़ क्षेत्र (सिवनी) से मात्र पांच माह की उम्र में रेस्क्यू किया गया था। कान्हा के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग सेंटर में वैज्ञानिक पालन-पोषण के साथ प्राकृतिक शिकार और विचरण की ट्रेनिंग दी गई। छोड़ने के अभियान में कान्हा के संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी, रिजर्व निदेशक डॉ. ए. ए. अंसारी, रहली एसडीओ, मोहुली रेंजर सहित वन विशेषज्ञ मौजूद रहे।
राधा की विरासत: कान्हा से ही आया था संरक्षण का प्रेरणा स्रोत
आठ साल पहले, 2 अप्रैल 2018 को कान्हा से ही लाई गई बाघिन राधा (तत्कालीन पांच माह की शावक) ने नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिलाया और बाघों की आबादी स्थापित की। आज रिजर्व के छह रेंजों (नौरादेही, सिंगपुर, डोंगरगांव, मोहुली आदि) में युवा बाघ शिकार करने लगे हैं। पहले आंतरिक इलाकों तक का सीमित मूवमेंट अब सागर-जबलपुर रोड पार कर बाहरी क्षेत्रों तक फैल गया है।
जैव विविधता का खजाना: पर्याप्त शिकार आधार
रिजर्व विंध्य पर्वतमाला के पठारी भाग में फैला है, जहां मिश्रित-छिछले वन, महुआ, करंज, बेल, खैर, तेंदू जैसे 92+ वृक्ष प्रजातियां, 49+ झाड़ियां, 18+ बेल-लताएं और 35+ घासें हैं। सूअर, नीलगाय, चिंकारा, चीतल, सांभर जैसे शाकाहारी जीव बाघों का मुख्य भोजन हैं। यहां 50 तेंदुए, भेड़िए, जंगली कुत्ते के अलावा 250+ पक्षी प्रजातियां, जलचर, उभयचर मौजूद हैं। खुले घास के मैदान इसे जैव विविधता हॉटस्पॉट बनाते हैं।
ऐतिहासिक यात्रा: 1975 से टाइगर रिजर्व तक
1975 में नौरादेही गांव के नाम पर बने अभयारण्य को 2018 में बाघ शिफ्टिंग से बल मिला। पन्ना व रातापानी से प्राकृतिक मूवमेंट भी जारी है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित रानी दुर्गावती अभयारण्य (मूल 23.2 वर्ग किमी, प्रदेश का सबसे छोटा) को जोड़कर 2023 में इसे वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। चीता प्रोजेक्ट के लिए भी उपयुक्त माना जा रहा है।
निगरानी से मजबूत संरक्षण
डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए. ए. अंसारी के अनुसार, कॉलर आईडी से बाघ के हर मूवमेंट, शिकार क्षमता और एरिया पर नजर रखी जा रही है। ग्राम विस्थापन के बाद रहवास सुधार से बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है यह मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण का नया आयाम है।












