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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कांग्रेस को दिया अल्टीमेटम और प्रशासनिक अधिकारी को धमकी

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मुस्लिम सभा में बोले आरिफ हम और आप आपस में बंटकर कमजोर न करें

मैं कांग्रेस से कह रहा हूं कि वे बीजेपी के खौफ में न आए कांग्रेस के नेताओं को हमारे साथ खड़ा होना चाहिए यदि आप हमारे साथ नहीं आए तो हम भी आपको घर बिठा देंगे 

जब संविधान कुचला जाए हम पर जुल्म हो रहे हों और आप यानी कांग्रेसी घर में बैठे हों ये नहीं चलेगा

कांग्रेस पार्टी के अंदर चल रही अंदरूनी खींचतान और अनुशासनहीनता आज किसी से छिपी नहीं है। जब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष अपने ही कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों को निष्कासित करने या “घर बैठने” की बात करता है, तो यह उनके संगठन का आंतरिक विषय माना जा सकता है। लेकिन सवाल तब खड़ा होता है जब अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले खुद अपने राजनीतिक आचरण पर मौन साध लेते हैं।

कांग्रेस के एक विधायक महोदय, जो आज संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को नसीहत देते फिर रहे हैं, उनका अपना राजनीतिक इतिहास ही कांग्रेस विरोधी गतिविधियों से भरा रहा है। पूर्व में वे स्वयं कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे उद्देश्य साफ था कि कांग्रेस का उम्मीदवार हार जाए। यह केवल बगावत नहीं, बल्कि उस पार्टी की विचारधारा के साथ विश्वासघात था, जिसके नाम पर आज वे सत्ता का सुख भोग रहे हैं।

इतना ही नहीं, लगभग 3 साल पहले संपन्न हुए नगर निगम चुनाव में उत्तर विधानसभा के वार्ड क्रमांक 11 का मामला भी जनता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भली-भाँति याद है। वही विधायक जी, जो आज अनुशासन की दुहाई देते हैं, उन्होंने अपने ही एक समर्थक को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पार्षद चुनाव लड़वाया और लड़वाते आ रहे हैं नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी हार गया और विधायक यानि इनका समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार जीत गया। यह बात कांग्रेस पार्टी के भीतर भी किसी से छिपी नहीं है।

अब प्रश्न यह है कि जो नेता खुद अपनी पार्टी को हराने की रणनीति बनाते रहे हों, क्या उन्हें अपने ही कार्यकर्ताओं को निष्कासन की धमकी देने का नैतिक अधिकार है?

SIR को लेकर खुले मंच पर कलेक्टर को धमकी देना की छोड़ने वाले नहीं है हम आपको क्या ये उचित है?

भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मानना है कि राजनीतिक दल सिद्धांत, निष्ठा और पारदर्शिता से चलते हैं न कि अवसरवादी राजनीति और अंदरूनी साजिशों से। कांग्रेस में आज जो स्थिति बनी हुई है, वह उनकी विचारधारा की कमजोरी और नेतृत्व की विफलता को उजागर करती है।

जनता सब देख रही है, समझ रही है और यही कारण है कि देश और प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार लगातार सिमटता जा रहा है।

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