कांग्रेस का अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ शंखनाद
भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 24 फरवरी को भोपाल पहुंचेंगे। यहां आयोजित होने वाले विशाल किसान सम्मेलन से अमेरिका के साथ हुई विवादास्पद ट्रेड डील के खिलाफ मध्य प्रदेश से राष्ट्रव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घोषणा की कि यह आंदोलन देशभर के किसानों को एकजुट करेगा और उनकी आय व हितों की रक्षा करेगा।
ट्रेड डील का किसानों पर सीधा प्रहार:
आय में 20-30% गिरावट का खतराअमेरिकी ट्रेड डील (जिसमें कृषि उत्पादों का आयात-निर्यात शामिल है) मध्य प्रदेश के सोयाबीन, कपास और मक्का उत्पादक किसानों के लिए घातक साबित हो सकती है। पटवारी ने चेतावनी दी कि सस्ते अमेरिकी आयात से घरेलू बाजार में कीमतें धड़ाम से गिरेंगी।
।सोयाबीन किसान सबसे ज्यादा प्रभावित:
एमपी में 60 लाख हेक्टेयर पर सोयाबीन की खेती होती है (2025 कृषि आंकड़ों के अनुसार)। अमेरिकी सोयाबीन सस्ता होने से एम एस पी से नीचे बिक्री होगी, आय में 25-30% कमी संभव।
कपास पर संकट:
कपास उत्पादक पहले ही नुकसान झेल रहे हैं। आयात से भाव 10-15% गिर सकते हैं, जिससे कर्ज का बोझ बढ़ेगा।
मक्का उत्पादकों की मुश्किल:
मध्य भारत के 40% मक्का किसान प्रभावित, निर्यात पर निर्भरता घटेगी और लागत बढ़ेगी।यह डील किसानों की
आत्महत्या दर (एनसीआरबी डेटा: एमपी में 2024 में 2500+ मामले) को और बढ़ा सकती है, क्योंकि बिना सुरक्षा जाल के विदेशी बाजार हावी हो जाएगा। पटवारी बोले, यह किसानों के साथ विश्वासघात है।
नेतृत्व और आंदोलन की रूपरेखा:
देशव्यापी एकजुटता का संकल्प राहुल गांधी और खड़गे इस लड़ाई का नेतृत्व करेंगे। सम्मेलन के बाद आंदोलन यूपी, राजस्थान, बुंदेलखंड तक फैलेगा।
कांग्रेस का दावा:
ट्रेड डील रद्द करवाएंगे या किसान सुरक्षा विधेयक लाएंगे।
ट्रेड डील की वास्तविकता
यह एक अंतरिम फ्रेमवर्क समझौता है, जो फरवरी 2026 में घोषित हुआ। यह भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ कम करने, ऊर्जा खरीद ($500 अरब) और कृषि उत्पादों के आयात पर केंद्रित है ।
यह कोई पूर्ण FTA नहीं, बल्कि अंतरिम डील है जिसमें भारत अमेरिकी DDGS (पशु चारा), सोयाबीन ऑयल, रेड सोरघम, बादाम, सेब आदि पर टैरिफ घटाएगा या हटाएगा।
अमेरिका भारत पर 18% टैरिफ रखेगा










