सिरोंज:- मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव विनोद सेन ने कहा है की भारतीय जनता पार्टी की विदिशा जिला कार्यसमिति की सूची एक कड़वा सवाल खड़ा करती है—जिले में हजारो सेन समाज मजबूत सामाजिक उपस्थिति, फिर भी निर्णय लेने वाली मेज पर नाम क्यों नही?
क्या सेन समाज सिर्फ चुनावी रैलियों की भीड़ बढ़ाने के लिए हैं
? क्या उनकी भूमिका सिर्फ मंच सजाने, झंडा उठाने और नारे लगाने तक सीमित है ? नेतृत्व की कुर्सी पर जगह नहीं, लेकिन कार्यक्रमों में “व्यवस्था” की जिम्मेदारी—क्या यही राजनीतिक सम्मान है ?
जब वोट चाहिए तब “समरसता” और “सम्मान” की बातें, और जब संगठन की सूची बनती है तो वही समाज हाशिए पर! यह प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि सुनियोजित अनदेखी है।
सवाल सीधा है—क्या ये समुदाय साझेदार हैं या सिर्फ मंच सजाने का औज़ार? यदि बराबरी का दावा है, तो भागीदारी भी बराबरी की दिखनी चाहिए, वरना यह साफ संदेश है कि सेन समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा जा रहा है, नेतृत्व का हकदार नहीं।










