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मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधि विभाग की निष्क्रियता का परिणामस्वरूप कांग्रेस कमजोर हो रही है

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विजय पुर विधायक के निर्वाचन को शून्य होने के लिए उचित तरीके से केस की पैरवी का अभाव 


कांग्रेस विधि विभाग में शामिल फूल छाप लोग कांग्रेस की रीति और नीति को खत्म कर रहे हैं


भोपाल। गत दिनों मध्य प्रदेश की राजनीति में एक समाचार ने हलचल मचा दी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का आदेश ऐसे समय में आया जब प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। बात हो रही है विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को न्यायालय द्वारा शून्य घोषित करते हुए पराजित प्रत्याशी को बिना चुनाव विधायक घोषित करने का।बेशक न्यायालय का आदेश सर्वमान्य है लेकिन इस निर्णय की समीक्षा में हम पाएंगे कि विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन में कांग्रेस कमेटी के हजारों वकीलों की मौजूदगी के बावजूद मामले में पूरी शिद्दत से पैरवी का अभाव पाया गया। विजयपुर के विधायक के प्रकरण में मुंह की खाने वाली कांग्रेस के पास अच्छे वकीलों की फौज होने के बावजूद प्रकरण में ठीक तरह से पैरवी नहीं कर पाना कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है। आने वाले समय में राज्यसभा के चुनाव होना है और इसी रणनीति के चलते भाजपा ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और कांग्रेस को अपना एक विधायक खोना पड़ा।

इस मामले में कांग्रेस विधि विभाग के प्रदेश प्रवक्ता रहे डॉक्टर सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का ध्यान आकर्षित करते हुए कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जीतू पटवारी से मांग की है कि कांग्रेस कमेटी विधि विभाग की पूर्ण निष्क्रियता के कारण पार्टी को गहरा आघात हो रहा है। 

डॉक्टर सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग की निष्क्रियता के कारण प्रदेश भर के कांग्रेस समर्थित अधिवक्ताओं में उदासी छाई हुई है। जहां सत्ता धारी भाजपा का विधि प्रकोष्ठ पूरी मुस्तैदी से अपनी पार्टी के अधिवक्ताओं को साधकर सत्ता और संगठन को मजबूती प्रदान कर रहा है वहीं कांग्रेस का विधि विभाग मुख्यधारा से विमुख नज़र आता है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि विजयपुर सीट से मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन निरस्त होने को गंभीर चूक है, मध्य प्रदेश में जबकि कांग्रेस के पास एक से बढ़कर एक वकीलों की फौज है। यह मामला केवल एक विधायक की सदस्यता समाप्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश कांग्रेस संगठन की रणनीतिक एवं कानूनी कमजोरियों को उजागर करने वाली महत्वपूर्ण राजनीतिक चेतावनी के रूप में सामने आया है। पैरवी के दौरान अपेक्षित गंभीरता, अनुभवी विधि विशेषज्ञों की प्रभावी भागीदारी तथा समय रहते संगठनात्मक समन्वय का अभाव दिखाई दिया, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस को एक निर्वाचित विधायक की हानि उठानी पड़ी। अब सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या 63 रह गई है और राज्यसभा की सीट के लिए 58 मत आवश्यक है। ऐसी परिस्थिति में अगर क्रॉस वोटिंग, विधायकों की अनुपस्थिति या तकनीकी कारणों से मत अमान्य होने जैसी घटना हो जाती हैं तो कांग्रेस के हाथ से यह एक सीट भी चली जाएगी। उन्होंने एआईसीसी से प्रदेश की स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संगठनात्मक समीक्षा, विधायकों से संवाद, चुनाव प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था तथा कानूनी मामलों में अनुभवी नेतृत्व की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी को इस और ध्यान आकर्षित करना होगा अन्यथा विजयपुर जैसे अन्य मामलों के कारण कांग्रेस को नुकसान उठाना होगा।

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