बड़वानी। (सैयद रिजवान अली)
रमजान-उल-मुबारक का दूसरा अशरा आज पूरा होने के साथ ही पवित्र महीने का तीसरा और अंतिम अशरा यानी 'जहन्नुम से निजात' (नरक से मुक्ति) पाने का दौर शुरू हो गया है। इस मुबारक मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की इबादत में लीन हैं और अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं।
शहर की विभिन्न मस्जिदों में दूसरे अशरे के समापन और तीसरे अशरे की शुरुआत पर विशेष तकरीरें आयोजित की गईं। तकरीर के दौरान हाफिज साहब ने पवित्र कुरान शरीफ के हवाले से प्रकाश डालते हुए बताया कि इस अशरे में बंदा अल्लाह से अपने अनजाने में हुए गुनाहों की माफी मांगता है। कुरान में भी गुनाहों से तौबा करने की दुआओं का जिक्र है।
साथ ही शहर मे पूरे महीने चलने वाले रमजान महीने के पर्व की तैयारियों मे प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है.. शहर की पुलिस व्यवस्था भी बहोत अच्छी है.. नवागत एसपी, कलेक्टर, SDOP और तमाम लोग रमजान पर्व के लिए सहभागिता निभा रहे है..
इबादत और तकरीरें:-
जामा मस्जिद में हाफिज अब्दुल जब्बार नूरी, बशीरन मस्जिद में हाफिज मो. नवेद साहब और हाफिज अरमान साहब ने हजरत अली की बहादुरी और उनकी शहादत पर रोशनी डाली। शहर की अन्य प्रमुख मस्जिदों जैसे कदीमी मस्जिद, उस्मानिया मस्जिद, सऊद मस्जिद, शाही मस्जिद और रानीपुरा मस्जिद में भी उलेमाओं ने इस्लाम के भाईचारे और नेक जिंदगी जीने के सिद्धांतों पर जोर दिया।
शब-ए-कद्र का महत्व:-
नगर के मुस्लिम बुद्धिजीवी एवं पत्रकार हाजी अब्दुल अजीज मंसूरी ने बताया कि तीसरे अशरे में ही 'शब-ए-कद्र' की मुकद्दस रात आती है। यह रात जहन्नुम के अजाब से छुटकारा दिलाने वाली और बरकतों वाली होती है। इस रात में अधिक से अधिक इबादत और दुआ करने की ताकीद की गई है।
मानवता का संदेश:-
सामाजिक कार्यकर्ता और पुलिस अधिकारी असद खान ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रमजान का महीना सादगी, ईमानदारी और बुराइयों से बचने का महीना है। उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के बताए सच्चाई के मार्ग पर चलने और इंसानियत की सेवा करने का संदेश दिया।
बाजारों में रौनक:-
बड़वानी शहर में सुबह 4 बजे से ही सहरी की चहल-पहल शुरू हो जाती है, जो शाम 6:41 बजे इफ्तार तक जारी रहती है। रोजेदार पूरे जोश के साथ इबादत कर रहे हैं और मुल्क की खुशहाली की दुआ मांग रहे हैं। जैसे-जैसे यह पवित्र माह समापन की ओर बढ़ रहा है, बाजारों में भी खरीदारी बढ़ गई है। फुटपाथ बाजार, कपड़ा दुकानों और किराना दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग खैरात और जकात देने के कामों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।










