मुंबई। केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में संशोधन का नया मसौदा जारी किया है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती बढ़ने वाली है। नए प्रस्ताव के अनुसार, कंपनियों को अब सरकारी निर्देश, गाइडलाइन और एडवाइजरी मानना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
सबसे बड़ा बदलाव ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान से जुड़ा है। अभी तक इस नियम के तहत प्लेटफॉर्म यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं होते थे, लेकिन नए मसौदे में कंपनियों को हर पोस्ट के लिए जवाबदेह बनाया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन पर यह कानूनी सुरक्षा खत्म हो सकती है।
इसके अलावा, अगर किसी कानून के तहत डेटा सुरक्षित रखना जरूरी है, तो कंपनियां उसे डिलीट नहीं कर सकेंगी। अब सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स पोस्ट करने वाले यूजर्स भी डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के दायरे में आएंगे।
सरकार बिना शिकायत के भी किसी कंटेंट को जांच के लिए कमेटी के पास भेज सकेगी। इस मसौदे पर 14 अप्रैल तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। वहीं, कुछ संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डालने वाला कदम बताया है।
प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स पंजीकृत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने इसे ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर कार्यपालिका के अधिकारों का खतरनाक विस्तार बताया।साथ ही इसे डिजिटल तानाशाही' करार दिया है। संगठन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कार्यपालिका के बढ़ते नियंत्रण को लेकर चिंता जताई है।
श्री सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने कहा कि संगठन कार्यपालिका की अनियंत्रित शक्तियों के लगातार विस्तार से गहरे तौर पर चिंतित हैं, जो भारत के संविधान के खिलाफ है। मंत्रालय की मौजूदा कार्रवाई 'डिजिटल तानाशाही' की ओर इशारा करती है और हम इन प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग करते हैं।










