दिल्ली की विशेष MP/MLA न्यायालय ने दतिया विधायक राजेंद्र भारती को 25 वर्ष पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में 3 वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया।
सजा का विवरण
1 अप्रैल 2026 को दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद, 2 अप्रैल को सजा का फैसला आया, जिसमें राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120(B) के तहत 3 साल की सजा दी गई। बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया, लेकिन उनकी सजा का स्पष्ट उल्लेख उपलब्ध स्रोतों में नहीं है।
कानूनी पृष्ठभूमि
मामला 1998 की 10 लाख रुपये की फर्जी FD अवधि बढ़ाने से जुड़ा था, जिससे बैंक को 1999-2011 तक प्रतिवर्ष 1.35 लाख का नुकसान हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने अपील 2764/2024 में आरोपों की पुष्टि की थी।
यह फैसला मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मामले का सार
वर्ष 1998 में राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक, दतिया में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) मात्र 3 वर्ष के लिए 13.50% वार्षिक ब्याज पर जमा की थी। उस समय भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष एवं श्याम सुंदर श्याम जनसहयोग एवं समुदायिक विकास संस्थान के बोर्ड सदस्य थे, जिससे दोनों संस्थाओं में उनका प्रत्यक्ष हित जुड़ा हुआ था।
धोखाधड़ी का modus operandi
भारती ने अपनी पदवी का दुरुपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी प्रजापति के साथ साजिश रचकर FD संबंधी दस्तावेजों (लेजर बुक, काउंटर स्लिप, रसीद) में काट-छांट की, जिससे 3 वर्ष की अवधि को 10 एवं 15 वर्ष तक बढ़ा दिया गया। इससे 1999 से 2011 तक प्रतिवर्ष 1.35 लाख रुपये का अनुचित ब्याज लाभ उनकी मां एवं संस्था को मिला, जिसकी सदोष हानि बैंक को हुई।
कानूनी प्रक्रिया
बैंक ऑडिटर के objection के बाद संयुक्त रजिस्ट्रार के आदेश पर 29 जुलाई 2015 को CJM दतिया कोर्ट में परिवाद दर्ज हुआ। विशेष न्यायालय ग्वालियर ने भारती पर IPC धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120(B) तथा प्रजापति पर अतिरिक्त धारा 409 के आरोप तय किए, जिनकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने क्रिमिनल अपील 2764/2024 में की। अभियोजन साक्ष्यों से मामला संदेह से परे सिद्ध हुआ, अतः 1 अप्रैल 2026 को दोनों को दोषी करार दिया गया।










