नल में से निकलते सांप
पीने के पानी सप्लाई में निकल रहे सांप।
छतरपुर //जिले के नगर पालिका महाराजपुर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में गड़बड़ी और गंदे पानी की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बीच अब यह मामला और भी गंभीर हो गया है, क्योंकि हाल ही में वार्ड संख्या 11, ख़ादिया मुहल्ला में नल से सांप निकलने की घटना सामने आई है।
घटना और जनहित का मुद्दा
सुबह खुले नल से पानी के साथ एक सांप निकलने से पूरे मोहल्ले में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया है, लोगों का कहना है कि कई दिनों से ही पानी की गुणवत्ता खराब रही है, जिसमें कीचड़ और गंदगी मिली हुई मिलती रही।
वार्डवासियों ने इस घटना का वीडियो बनाकर छतरपुर कलेक्टर को व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दिया है और न्याय व कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि बिना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ ना किया जाए।
नगर पालिका की ढीली व्यवस्था
नगर पालिका महाराजपुर की पानी की टंकी और शुद्धिकरण व्यवस्था पुरानी है; इसका शुरूआती निर्माण 1980 के दशक के आसपास हुआ था, जिसमें मूलत: लोहऊ के पुल पर बने कुएं से पानी लेकर टंकी में भरा जाता था और फिर शुद्धिकरण के बाद बाँटा जाता था। �
लेकिन 2005–10 के बीच व्यवस्था में बदलाव के बाद अब पानी सीधे तालाब और डकवेल से नलों तक डायरेक्ट दिया जा रहा है, जबकि लोहऊ के पुल के कुएं की पाइप लाइन लंबे समय से कुम्हार नदी में टूटी पड़ी है, जिससे जल स्रोत और वितरण प्रणाली में गंभीर खामी है।
गंदे पानी, लापरवाही और राजस्व वसूली
नगर पालिका लगभग 1900–2000 उपभोक्ताओं को नल कनेक्शन देती है, हालांकि रजिस्टर में केवल 1600–1700 कनेक्शन दिखाए जाते हैं; प्रति नल 65 रुपये राजस्व और चक्रवृद्धि जुर्माना लगाकर करोड़ों रुपए की वसूली होती है, लेकिन जल की गुणवत्ता पर न कोई नियमित सफाई है न ही लैब जांच।
जब कोई सीएम हेल्पलाइन या सोशल मीडिया पर शिकायत कर देता है तो तात्कालिक तौर पर साफ दिखने की नाटकीय व्यवस्था करके वीडियो वायरल होने के बाद फिर पालिका नलों को दूसरी साइड से जोड़ देती है, किन्तु पानी की शुद्धता या टंकी की सफाई की ओर ध्यान नहीं देती।
टैंकर, गर्मी और आर्थिक अपराध ब्यूरो का पत्र
गर्मियों में नगर पालिका टैंकर से पानी सप्लाई के नाम पर लाखों–करोड़ों रुपए खर्च करती है, जबकि यह व्यवस्था नियमों के विपरीत बताई जाती है और इस पर नियमित ऑडिट या रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
राज्य सरकार ने आर्थिक अपराध ब्यूरो के एक पत्र के जरिए महाराजपुर नगर पालिका पर कार्रवाई की स्वीकृति नहीं दी है, जिससे यह लगता है कि यहां की व्यवस्था विशेष रूप से “संरक्षित” रखी जा रही है, जिससे जनता में अविश्वास और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ रही है।
प्रशासनिक संरचना और जवाबदेही
नगर पालिका महाराजपुर के मुख्य अधिकारी के पद पर वर्तमान में शैलेंद्र सिंह चौहान जी का प्रभार है, जो महीने के लगभग चार दिन ही उपस्थित रहते हैं; पानी की आपूर्ति शाखा का प्रभार पहले कुसुमाकर चौरसिया जी के पास था, अब यह प्रभार स्टोर प्रभारी संदीप शर्मा के पास है, जिससे विशेषज्ञता और जिम्मेदारी का अभाव बना रहता है।
नगरपालिका के अंदर छोटे–छोटे सेक्शन में पानी की सप्लाई की व्यवस्था बना दी गई है – जहां सप्ताह में कुछ इलाकों को 2 तो कुछ को 4 दिन पानी मिलता है – इससे गुणवत्ता और नियमितता का आकलन करना प्राय: नामुमकिन हो गया है।
कार्रवाई की मांग और अगला कदम
लोगों की मांग है कि मुख्यमंत्री ग्राहक सेवा पोर्टल, नगर विकास विभाग, तकनीकी निरीक्षण टीम और राज्य जल मानक अधिकरण की तुरंत जांच टीम महाराजपुर भेजी जाए, जिसमें जल स्रोत, टंकी, पाइप लाइन, टैंकर खरीद व राजस्व वसूली की पूर्ण जांच की जाए।
साथ ही जल स्वच्छता और स्वास्थ्य विभाग को भी शहर में नलों से निकलने वाले पानी के सैम्पल लेकर लैब जांच कराने का आदेश दिया जाए, ताकि यह जांच हो सके कि असल में पानी कितना दूषित है और नल से सांप निकलने की घटना किन तकनीकी और प्रशासनिक चूकों की वजह से संभव हुई है।












