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ब्रिटिश काल (1892)-लगभग 3000 से ज्यादा तालाब खुदवाए गए थे (अकाल राहत के लिए जमींदारों को आदेश)। 1995 में कैप्टन ब्लंट की यात्रा रिपोर्ट में भी हजारों तालाबों का जिक्र।

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रायपुर (छत्तीसगढ़ की राजधानी) को ऐतिहासिक रूप से तालाबों का शहर कहा जाता था।


 राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज, नगर निगम के आंकड़े और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार तालाबों की संख्या समय के साथ तेजी से घटी है।  प्राचीन काल (कलचुरी वंश/रतनपुर रियासत) रायपुर में 300 से ज्यादा तालाब माने जाते थे। रतनपुर रियासत में कुल 1400 तालाबों के प्रमाण मिलते हैं। 


ब्रिटिश काल (1892)-लगभग 3000 से ज्यादा तालाब खुदवाए गए थे (अकाल राहत के लिए जमींदारों को आदेश)। 1995 में कैप्टन ब्लंट की यात्रा रिपोर्ट में भी हजारों तालाबों का जिक्र। 


साल 2000- लगभग 1000 तालाब/झीलें (राजस्व और सरकारी सर्वे के आधार पर)। 

2021 के आसपास (एनजीटी सुनवाई में सरकारी/राजस्व रिकॉर्ड) कुल 227 तालाब दर्ज थे। इनमें से 53 पहले ही सूख चुके या कब्जे में थे, बचे 175, 

2024 (नगर निगम रायपुर का आधिकारिक बयान) केवल 109 तालाब बचे हैं। यानी एनजीटी वाले 227 में से तीन साल में अतिरिक्त 66 तालाब लुप्त हो गए। यह सबसे हालिया और आधिकारिक आंकड़ा है। 

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का 120 तालाब जिनके पुख्ता सबूत हैं। 


आंकड़ों में पानी वाले तालाब गिनती हैं, कुछ सूखे/कब्जे वाले भी शामिल करती हैं। राजस्व रिकॉर्ड में कई तालाबों का क्षेत्रफल पहले घटता है (जैसे तेलीबांधा तालाब 1929-30 में 35 एकड़ था, अब आधा से भी कम), फिर पूरी तरह गायब हो जाते हैं।जिले (ग्रामीण रायपुर जिला) के आंकड़े (अगर आपका मतलब जिला है)एक पुरानी अध्ययन (2017) के अनुसार पूरे रायपुर जिले (ग्रामीण क्षेत्र) में कुल 9370 तालाब थे (सिंचाई क्षमता के आधार पर वर्गीकृत)। इनमें से ज्यादातर सरकारी/ग्राम पंचायत स्वामित्व वाले। लेकिन शहर के शहरीकरण से अलग यह है। 


क्यों घटे तालाब मुद्दा है — 5 सालों में 45% गिरा शहर का वाटर लेवल। मुख्य कारण, बढ़ता शहरीकरण, तालाब पाटकर कॉलोनी, रोड, मॉल, स्कूल, कॉलेज, प्लेग्राउंड बनाए गए ( राजबंधा तालाब → राजबंधा मैदान → डेंटल कॉलेज, सरजूबंधा → पुलिस लाइन, खंटो तालाब → शक्तिनगर कॉलोनी)।

अवैध कब्जा और भूमि माफिया - कई तालाबों का क्षेत्रफल राजस्व रिकॉर्ड में घटाया गया।

बोरवेल/नल कनेक्शन-बारिश का पानी संरक्षण कम हुआ।

प्रदूषण - गणेश/दुर्गा विसर्जन, कचरा डंपिंग।

तालाबों आपस में जुड़े थे (बारिश का पानी खारुन नदी तक जाता था), अब रोड/बिल्डिंग ने ब्लॉक कर दिया।


नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी कई तालाबों को “संवारने” के नाम पर स्थिति बदतर हुई।क्या किया जा सकता है / समाधान बोरवेल संख्या पर नियंत्रण और रिमोट सेंसिंग से जल प्रबंधन। सरकार/नगर निगम को राजस्व रिकॉर्ड अपडेट कर तालाबों को संरक्षित घोषित करना चाहिए जैसे कुछ बचे तालाबों का पुनरुद्धार - महाराजबंध, बूढ़ा तालाब आदि।


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