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जो समाचार हलचल पैदा करते हैं इस सप्ताह मै

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 54- सप्ताह की हलचल :-  2026 का मार्च के इस सप्ताह मै जो समाचार हलचल पैदा करते हैं-        


                                                                  1- खाड़ी मै चल रहे ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध मै ईरान ने उस पुरानी स्थापित परम्परा को नकार दिया कि देश के राजा बादशाह या राष्ट्रपति या सत्ता प्रमुख को गिरफ्तार या मार दैने से युद्ध या देश जीता जा सकता है।          ,                                                                                    

    2-   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वर्तमान परिस्थितियों तथा बढते स्वरूप आज के परिवेश अनुकूल व्यवस्था तथा गणवेश मै बडे़ दूरगामी परिवर्तन किया इस दशक मै जब सगठन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर चुका है।                                                                                         

   3-  सहारा के निवेशकों के लिए बड़ी खबर कि उनके निवेश की राशि को बे सहारा रिफंड पोर्टल पर अपने निवेश के अधिकतम 50 हजार रुपये  केवल 31 दिसम्बर 2026 तक  आबेदन कर ही प्राप्त कर सकते हैं।         ,     

                                                                                      1-   हम सब छोटी आयु  से अब तक देखते पढते आ रहे कि राज्यों के युद्ध रहे हो हो या सियासत हो या शतरंज का खेल बादशाह या सत्ता प्रमुख क़ो कैद करने या मारने के या समर्पण करने के बाद युद्ध समाप्त हो जाता था। विजयी राष्ट्र पराजित राष्ट्र के आधीन हो जाता रहा है। हाल ही मै अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने बैनेजुएला के राष्ट्रपति को सोते से कैद कर बैनेजुएला पर कब्जा कर लिया था ! बैनेजुएला की सैना ने पराजय स्वीकार कर अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया था। लेकिन इस सत्ता परिवर्तन के अमेरिका के खेल के बाद जब यही नीति ईरान पर इजराइल के साथ मिलकर अपनाई । ईरान को आपसी बात कर समाधान निकालने मै उलझा अनायास जब ईरान सुप्रीम आयतुल्लाह खुमेनेई जब ईरान सैना मुख्यालय मै चर्चा की रुपरेखा बना रहे थे उसी समय ईरान के उस सैना मुख्यालय पर भीषण बमबारी कर आयतुल्लाह खुमेनेई  सहित टोप लीडर तथा सैन्य अफसरों को मार दिया सोचा था । अमेरिका ने सोचा था बादशाह सत्ता प्रमुख के मारने के बाद ईरान सैना सरेंडर कर देगा अमेरिका के सामने, ! लैकिन मेरी नज़र मै शायद पहली बार हुआ कि देश के सत्ता प्रमुख टाप लीडर सैना प्रमुख के एकसाथ मरने के बाद किसी देश  ने सरेंडर नहीं किया बल्कि 22 दिन तक लगातार इजराइल तथा अमेरिका को मददगार सभी 13 देशों पर मिसाइल ड्रोन से कहर बरपा रखा है। इस समय ईरान ने महाभारत के चक्रव्यूह की याद दिला दी जिसमें रथी प्रवेश कर भले ही एक रथी को मार दे पर जीत कर निकलना तब समभव होता था जब 9 के 9 महारथियों को मार दे! एक या पाच महारथियों के मारने से युद्धों को नहीं जीता जा सकता है। यह अलग है बैनेजुएला की तरह ईरान छोटा कम सेन्य ताकत आबादी बाला देश ईरान उससे बहुत बड़ा है। ईरान ने जिस तरह अमेरिका इजराइल इनलैंड के हथियारों की मदद के बाद झुकने को तैयार नहीं बल्कि कूटनैतिक युद्ध कर हार्मोज समुद्री सकरे रास्ते से दुनिया की एलपीजी गैस पेट्रोलियम उत्पादों के जहाजों को निकलना बन्द कर दुनिया के देशों मै तनाव पैदा कर दिया वहीँ इजराइल भर नहीं अमेरिका को सैन्यवेश दैने बाले ईरान ने अपने पडोसी एक दो 12 देशों पर मिसाइल ड्रोन 22 दिन से लगातार बारुद बरशा कर जीना दूभर कर दिया है। अमेरिका उसकी मारक छमता के बाहर हो पर अमेरिका के अजेय कहे जाने एफ -15 पर मिसाइल दाग छति पहुचा तथा 4000 किलोमीटर दूर तक यूरोप देश पर मिसाइल दाग कर दुनिया को हैरत मै डाल दिया। ईरान के सत्ता प्रमुख खोमनेई ने 45-50 वर्ष चुप रहकर आपने देश ईरान को दुनिया की घातक मिसाइल बना बहुत मजबूत किया था, विद्या  या तकनीक किसी की बापोती नहीं हर कोई प्राप्त कर सकता है। यह हमारे पौराणिक ग्रन्थों को साबित कर रहा सुर या असुर शक्ति अस्त्र शस्त्र सब हासिल कर सकते हैं। मै तो सोचता यदि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री बनते परमाणु तैयार करा परीक्षण न कर दिया होता तो! आज के जो हालात हैं परमाणु समपन्न राष्ट्र बन ही न पाते जब ईरान जैसे जीभट राष्ट्र को अमेरिका इजराइल नहीं बनाने दे रहा है। मै इस निष्कर्ष पर इस युद्ध को देख पहुँचा कि युद्ध केवल नेतृत्व भर से नहीं रणनीति, देश प्रेम, बहादुरी, निडर सैना और हथियारों से जीता जा सकता है। देश को रणनीति प्यास लगने पर कुआँ खोदने से नहीं ! शान्ति काल मै ही सत्ता शक्ति तथा निर्णय अधिकार  का विकेन्द्रीकरण की योजना बनाकर रखनी चाहिए ईरान या हमारे चक्रव्यूह की तरह कि दुश्मन फसे तो या मरे या हमारी शर्तों पर निकल सके।                                               

  2-  हिन्दू को एकता के सूत्र मै पिरोने को सकल्पित सस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को इस वर्ष 100 स्थापना को पूर्ण हो गये हैं। इन 99 वर्ष मै सघ अपनी तय व्यवस्था मै बिना कोई छेड छाड केवल व्यापक सगठन बनाने के लक्ष्य पर लगा रहा बिना सोचे कौन क्या कह रहा और क्या कुछ परिवर्तन लाभ दे सकता है ! यह विचार किये। 97 वर्ष मै वर्तमान सरसघचालक श्री मोहन भागवत जी ने 100 पूर्ण करने के पहले वर्तमान परिवेश की माग को ध्यान रख हाफ पैंट जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहचान है उसके स्थान पर फुल पैंट बैल्ट हल्का रगों का परिवर्तन कर बदलाव स्वीकार किया गया राष्ट्रीय कार्यकारणी की सहमति से। हाल इसी सप्ताह हरियाणा मै राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक मै व्यवस्था को लेकर सघ के बड़े स्वरूप तथा बढते अनुसागिक सगठन के विस्तार को मद्देनजर रख। जो सघ मै प्रान्त व्यवस्था थी वह बडे़ प्रदेश महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि मै राज्य को दो से अधिक प्रान्त मै बाट रखा था उदाहरण अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य मै सघ के तीन प्रान्त थे मध्यभारत, महाकौशल छत्तीसगढ़। सघ के कार्य को विकेन्द्रीकरण करने चुस्त करने इस प्रान्त व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया! अब राज्य तथा सम्भाग की नयी व्यवस्था स्वीकार की गई जो राजस्व प्रदेश तथा सम्भाग  है वही  व्यवस्था रहेगी यानी प्रान्त प्रचारक, प्रान्त सघचालक, प्रान्त कार्यवाह पद समाप्त हो जाऐगे! प्रदेश प्रचारक, सघचालक, कार्यवाह तथा सम्भाग प्रचारक, सघचालक, कार्यवाह होगें विभाग जिला की व्यवस्था यथावत रहेगी । इसके प्रथक महाराष्ट्र की एक सार्वजनिक कार्यक्रम मै सरसघचालक श्री भागवत जी ने व्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही, ! अनुसागिक सगठन मै सघ एक टोली राष्ट्र से लेकर जिला स्तर तक जो 5- 7 स्वयंसेवक की होगी वह उस अनुसाॅगिक सगठन के क्रियाकलाप पर नज़र रखेगी। यहाँ यह नहीं कहा अनुसाॅगिक सगठन की सगठन महामन्त्री व्यवस्था समाप्त होगी ! पर यह स्पष्ट कहा कि 5 लोगों की टोली राष्ट्रीय से जिला स्तर तक होगी। मुझे लगता सघ ने यह टोली की बात इसलिए कही कि एक व्यक्ति को उस अनुसागिक सगठन के नेता लालच भय से दबा लेते हैं वर्तमान समय तथा उचित निर्णय नहीं हो रहे हैं ! यह बात भागवत जी ने नितिन गडकरी तथा देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री महाराष्ट्र की उपस्थिति मै कही। यानी भाजपा मै जौ वर्तमान मै दूसरी लाइन बनाना दूर! मिटाने की परम्परा हो गई है, मै मेरे बाद मेरा परिवार दूसरी लाइन है तय ! यह परम्परा समाप्त होकर सघ अनुसागिक सगठन मै दूसरी तीसरी लाइन तैयार करेगा, जब सघ के हस्तक्षेप से बनेगी लाइन तो समर्पित निष्ठावान की ही बनेगी जो यह सघ टोली उस अनुसाॅगिक सगठन मै तय करेगा। मेरा मानना वर्तमान पर्ची से मुख्यमंत्री तथा प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष निकलना भाजपा मै जनता को ठीक नहीं लग रहा जिस जन असन्तोष को सघ ने परख नयी व्यवस्था दी है।       

                                 3-  अब आखरी मुझे जो बड़ा समाचार युद्ध तथा रसोई की लाइन मै खो गया आम जनता से जुडा है। ,, सहारा  ,, निवेश की निवेशकों को वापसी मै ! इसे महत्वपूर्ण इसलिए मानता ,, क्योंकि,, सहारा,, मै देश के 90% गरीब ने अपनी गाढ़ी कमाई बेटी की शादी स्वयं के बुढ़ापे के लिए ज्यादा मिलने की लालच मै  निवेश किया था । इन गरीब का गाढ़ी कमाई का पैसा दुगना तिगुना दूर मूल डूब जाये चिंता का विषय था सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर  भारत के प्रधानमंत्री  सहकारिता मत्री ने चिंता कर लौटने का प्रयास चल रहा है। कम निवेशकों को यह  जानकारी है उनको अपने निवेश की जानकारी खाता आधार सहित पूरी जानकारी आबेदन सहारा रिफंड पोर्टल पर  अपलोड करना है वह  भी __31 दिसम्बर 2026_  तक । समाचार छोटा सा छपा कि भारत के सहकारिता मत्री श्री अमित शाह जी ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर मै बताया कि,! फरवरी 26 तक सहारा रिफंड पोर्टल पर एक करोड़ पैतालीस लाख  आबेदन चार   करोड़ 60 लाख रुपये रिफंड के लिए आये है तथा 40 लाख निवेशकों को पैसा वापसी उनके आधार लिक बैंक खाते मै अधिकतम् 50 हजार एक निवेशक को किया गया है। उनने यह भी बताया सहारा रिफंड पोर्टल पर निवेशकों द्वारा अपने आबेदन दैने की अन्तिम तिथि 31 दिसम्बर 2026 है। मेरा सोचना है कि हर पाठक को यह  कि बे गरीब ग्रमीण सहारा निवेशकों को  ! 31 दिसम्बर से पहले सहारा रिफंड पोर्टल पर अपना आबेदन सहारा की पावती आधार नम्बर लिक बाले बैंक एकाउंट को ले जाकर औन लाइन कराना है । इसमें सहारा ऐजेंट भी मदद करें।  इस सप्ताह इतना ही अगले सप्ताह फिर मिलते मार्च आखिरी सप्ताह की हलचल के साथ रविवार को।✍️ धीरेन्द्र कुमार नायक एडवोकेट जिला छतरपुर मध्यप्रदेश। 

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