भोपाल। आर टी आई एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर सैयद खालिद कैस एडवोकेट ने मध्य प्रदेश के हरदा जिले में आरटीआई कार्यकर्ता आनंद जाट पर प्राणघातक हमला होने की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की।
श्री सैयद खालिद कैस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2005 में कांग्रेस नीत यू पी ए सरकार ने सूचना अधिकार अधिनियम लागू करके भ्रष्टाचार को उजागर करने का सशक्त हथियार जनमानस को सौंपा था लेकिन मोदी सरकार ने 2014 से लेकर वर्तमान समय तक इस कानून की मूल आत्मा कर इतने प्रहार किए जिससे इस कानून की धार कमजोर हो गई है।
सरकार के इस रवैए से भ्रष्ट आचरण अपनाने वाले मंत्री, लोकसेवक, भूमाफिया, जनप्रतिनिधि बेखौफ होकर आर टी आई एक्टिविस्ट समाज पर प्रहार कर रहे हैं। हरदा की यह घटना उसी तारतम्य में है।
गौर तलब हो कि मध्य प्रदेश के हरदा जिले में आर टी आई कार्यकर्ता श्री आनंद जाट पर लगभग 10–12 असामाजिक तत्वों द्वारा जानलेवा हमला करने की खबर आई है। यह अत्यंत निंदनीय और चिंताजनक घटना है। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया है।
श्री आनंद जाट ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से हरदा नगरपालिका अध्यक्ष के पति का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि हमले की शुरुआत उसी व्यक्ति द्वारा की गई। यदि यह आरोप सत्य है, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और जनहित की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।
यह सर्वविदित है कि श्री आनंद जाट पिछले कई दिनों से भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण कार्यों, जनता के धन की लूट और अवैध संपत्ति अर्जन जैसे गंभीर मुद्दों को उठाते रहे हैं। ऐसे में यह हमला संयोग नहीं, बल्कि साजिश प्रतीत होता है—एक साजिश, जो सच्चाई को कुचलने के लिए रची गई।
इस पूरे घटनाक्रम को समाज दो दृष्टिकोणों से देख रहा है—
पहला, वह वर्ग जो इसे लोकतंत्र और समाज के लिए खतरनाक संकेत मानता है। उनके लिए श्री आनंद जाट जैसे लोग वे साहसी आवाज़ हैं, जो भ्रष्टाचार रूपी दीमक से लड़ रहे हैं और जनता के अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं।
दूसरा, वह वर्ग जो दुर्भाग्यवश भ्रष्टाचार को ही सामान्य मान चुका है। ऐसे लोग यह प्रश्न उठाते हैं कि आखिर कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ क्यों उठाए? वे भ्रष्टाचारियों को सम्मान देने की मानसिकता रखते हैं—जो समाज के पतन का सबसे बड़ा कारण है।
आज का कड़वा सच यह है कि—
भ्रष्टाचार अब बुराई नहीं, बल्कि “सफलता” का प्रतीक बना दिया गया है।
जनता के हकों को लूटकर खड़ी की गई झूठी शान-ओ-शौकत को समाज में प्रतिष्ठा मिल रही है।
ऐसे विकट समय में, सत्य के पक्ष में खड़ा होना और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना दुर्लभ हो गया है। लेकिन यही वह समय है जब हमें तय करना होगा—हम अन्याय के साथ हैं या उसके खिलाफ। श्री आनंद जाट जैसे लोगों का साथ देना केवल एक व्यक्ति का समर्थन नहीं, बल्कि उस विचार का समर्थन है जो समाज को ईमानदारी, न्याय और समानता की दिशा में ले जाता है।










