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शशि दीप की कृति अंतर्मन का उद्घोष पाठकों के अंतर्मन को छूने में सफल

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 शशि दीप की कृति अंतर्मन का उद्घोष पाठकों के अंतर्मन को छूने में सफल


संपत जाधव की रिपोर्ट

मुंबई। द्विभाषी लेखिका और समाजसेवी शशि दीप द्वारा लिखित तीसरी पुस्तक "अंतर्मन का उद्घोष" चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर ही प्रकाशित होकर फ्लिपकार्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होते ही किताब की बुकिंग जोरों से चल रही है। हैदराबाद से पत्रकार मीर मोहम्मद और मुंबई की दिशा व्यास प्रथम व द्वितीय पाठक रहे जिन्होंने प्रकाशित होते ही किताब ऑर्डर किया। दिल्ली की चर्चित समृद्ध पब्लिकेशन से चयन प्रक्रिया से प्रकाशित यह किताब रील और रियल दोनों तरह से खासी चर्चित हो रही है। पुस्तक के आकर्षक कवर व शीर्षक का श्रेय पत्रकारों के प्रहरी भोपाल निवासी डॉ सैयद खालिद कैस को जाता है। प्रकाशन के दूसरे हफ्ते में ही किताब देश के कोने-कोने में पहुंच चुका है। हरियाणा के सोनीपत से आध्यात्मिक हस्ती पूर्व बैंकर राकेश पोपली, किताब मिलते ही लिखे "शशि दीप जी, आपकी पुस्तक प्राप्त हुई। प्रथम दृष्टया और कुछ अध्याय पढ़ने पर, यह मेरे अपने अनुभवों का प्रतिबिंब प्रतीत हुई। मेरे आत्मीय संदेश को पूरा एक पृष्ठ समर्पित है। आपकी प्रामाणिक लेखनी पढ़कर और जुड़कर मैं इसे मेरे अच्छे कर्मों का फल मानता हूं बैंकिंग की भाषा में कहें तो विचारों के 'विजडम बैंक' का वफादार ग्राहक होने के लिए धन्यवाद, जहाँ कृतज्ञता ही एकमात्र करेंसी है और मित्रता ही स्थायी संपत्ति है।"


वही पवित्र नगरी प्रयागराज के घनघोर पुस्तक प्रेमी, विचारक प्रभाकर सिंह ने किताब मिलते ही फ़ेसबुक हैंडल में लिखा "आखिरकार शशि दीप जी की बहुप्रतीक्षित कृति 'अंतर्मन का उद्घोष' पहुंच में आ ही गई। अब स्वाध्याय होगा।"


वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर से दो महान शख्सियतों के कर कमलों में किताब पहुंची। किताब पाने के बाद रायपुर के जाने-माने कवि राजेश जैन राही ने संक्षिप्त समीक्षा करते हुए कहा- "प्रख्यात लेखिका मुंबई निवासी (मूलतः बिलासपुर छत्तीसगढ़) शशि दीप जी की कृति 'अंतर्मन का उद्घोष' कल ही फ्लिपकार्ट द्वारा प्राप्त हुई। पुस्तक की छपाई, कलेवर, कवर पेज बहुत ही बेहतरीन है। पुस्तक में प्रूफ की कोई गलती नहीं  दिखी। जैसा की शीर्षक से अंदाजा लगता है अंतर्मन की बात इस पुस्तक में लिखी गई है। 60-65 के करीब लेख इसमें हैं। इन लेखों में मौलिकता है। लेखिका ने अपने नजरिए से समाज को देश को देखा है और जहां-जहां इन्हें कुछ अच्छा या गलत दिखा उसे अपने ढंग से शब्द बद्ध किया है। बारी-बारी से मैं इन्हें पढ़कर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया शशि दीप तक अवश्य प्रेषित करूंगा।" 


वहीं पंडित पी के तिवारी जी, प्रधान संपादक दैनिक दबंग स्वर, रायपुर ने पुस्तक प्राप्त करने के बाद अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और पुस्तक के कवर से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने पुस्तक की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। दुर्ग की पाठक वेणु कुरेशिया ने भी पुस्तक मिलने पर हर्ष व्यक्त किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंबई, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, धार और भोपाल तथा कुछ और शहरों के पाठकों द्वारा किताब की प्रतियां मंगाई गयी है।

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