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EXCLUSIVE | ऑपरेशन पीएम पोषण

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 EXCLUSIVE | ऑपरेशन पीएम पोषण

क्या बच्चों की थाली पर सिर्फ कागज़ी निगरानी.? 

ग्राउंड ज़ीरो  में भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार की डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश //छतरपुर | नौगांव विकासखंड | महाराजपुर संकुल | ग्राम नाथपुर से विशेष खोजी रिपोर्ट

रिपोर्ट: खेमराज चौरसिया। 07 अगस्त दिन शुक्रवार 2026 का ग्राउंड ज़ीरो

भारत सरकार की पीएम पोषण (PM POSHAN) योजना और मध्य प्रदेश सरकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को निर्धारित मेनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले तथा उसकी प्रतिदिन ऑनलाइन मॉनिटरिंग हो। इसके लिए MP PM Poshan Shakti Nirman App के माध्यम से भोजन बनने, लाभार्थियों की संख्या, दैनिक रिपोर्टिंग और निरीक्षण की जानकारी दर्ज की जाती है। वहीं आंगनवाड़ी सेवाओं की निगरानी Poshan Tracker ऐप के माध्यम से की जाती है।

डिजिटल सिस्टम में प्रतिदिन क्या दर्ज किया जाता है?

विद्यालय (PM POSHAN)

- उस दिन भोजन बना या नहीं।-

 कितने विद्यार्थियों ने भोजन किया।

- निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन परोसा गया या नहीं।

- दैनिक भोजन रिपोर्ट।

- निरीक्षण एवं मॉनिटरिंग संबंधी प्रविष्टियां।

- कई मामलों में मोबाइल ऐप के माध्यम से सत्यापन।

आंगनवाड़ी (Poshan Tracker)


- बच्चों की उपस्थिति।

- नाश्ता एवं पूरक पोषण आहार वितरण।

- गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की सेवाएं।

- बच्चों का वजन, लंबाई एवं पोषण संबंधी रिकॉर्ड।

ग्राउंड ज़ीरो पर क्या मिला?

छतरपुर जिले के नौगांव विकासखंड अंतर्गत महाराजपुर संकुल के ग्राम नाथपुर स्थित विद्यालय में निरीक्षण के दौरान उपलब्ध भोजन निर्धारित मेनू के अनुरूप नहीं दिखाई दिया। शासकीय माध्यमिक शाला (EPES) नाथपुर, डाइस कोड 23090710901, में शाला प्रभारी के पद पर नरेंद्र सिंह परिहार पदस्थ हैं।

 वहीं रसोईया रामकली रैकवार सहित अन्य संबंधित लोगों से बात की विद्यालय के बच्चों हंस, सुमित, सुशील  ने विद्यालय में मिलने वाले भोजन एवं अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर शिकायत किए जाने की बात कही है। बच्चों के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराने की बात भी बताई है।

 अब सवाल यह है कि शिकायत के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच और बच्चों की शिकायत के निराकरण के लिए क्या कार्रवाई की?


जब विद्यालय के रजिस्टर एवं रिकॉर्ड देखने का अनुरोध किया गया, तब आरोप है कि प्रधानाध्यापक द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके कारण मौके पर मोबाइल ऐप की प्रविष्टियों और वास्तविक स्थिति का मिलान नहीं हो सका।

भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते दिखाई दिए, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस होती है।

 स्कूल परिसर में स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में क्यों बढ़ा विवाद?

स्थानीय स्तर पर जानकारी मिली कि संबंधित स्वयं सहायता समूह विद्यालय परिसर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में भी नाश्ता एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति करता है।

रिपोर्टिंग के दौरान आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों के नाश्ता की बात सुनते ही व्यवधान उत्पन्न होने, मोबाइल छीनने का प्रयास करने तथा अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप है। 

उस समय टीकाकरण दल मौजूद था, लेकिन लाभार्थी उपस्थित नहीं थे,विवाद का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।

 ( स्कूल के प्रिंसिपल एवं समूह संचालक का आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को आगे कर विवाद की स्थिति उत्पन्न करने की साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता है अक्सर छोटे कर्मचारियों से दबाव प्रलोभन देकर से ऐसे कृत की खबरें मिलती रहती हैं।) इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।


वीडियो से उठा बड़ा सवाल

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऐसा वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया, जिसमें दावा किया गया है कि सभी बच्चों के भोजन करने के बाद लगभग 50 ग्राम दाल दोबारा बनाई गई।

यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भोजन वितरण समाप्त होने के बाद दाल दोबारा बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या इसका रिकॉर्ड मोबाइल ऐप में दर्ज है.?

सबसे बड़े सवाल

- क्या पोषण ऐप में दर्ज जानकारी और वास्तविक स्थिति में अंतर है?

- क्या भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था केवल डेटा एंट्री तक सीमित होकर रह गई है?

- क्या जिला एवं राज्य स्तर पर ऐप में दर्ज जानकारी का नियमित भौतिक सत्यापन किया जाता है?

- क्या अचानक निरीक्षणों में ऐप, उपस्थिति रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भोजन का मिलान अनिवार्य रूप से होता है?

ग्राउंड ज़ीरो की मांग

- जिला कलेक्टर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएं।

- जिला शिक्षा अधिकारी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त जांच करें।

- विद्यालय के रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, MP PM Poshan Shakti Nirman App और Poshan Tracker की प्रविष्टियों का वास्तविक स्थिति से मिलान कराया जाए।

- उपलब्ध वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराई जाए।

- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डिजिटल निगरानी वास्तव में प्रभावी है या केवल कागज़ी और ऑनलाइन औपचारिकता बनकर रह गई है।

वीडियो गैलरी (Video Gallery)
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