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जान लेवा फास्ट फूड की लत ने अमरोहा की 16 वर्षीय अहाना की जान ले ली

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 जान लेवा फास्ट फूड की लत ने अमरोहा की 16 वर्षीय अहाना की जान ले ली

एक दुखद घटना के जरिए फास्ट फूड के खतरे को उजागर करती रिपोर्ट्स

मुरादाबाद// UP//  फास्ट फूड की लत ने अमरोहा की 16 वर्षीय अहाना की जान ले ली। लगातार चाउमीन, बर्गर और मोमो खाने से उसका वजन 70 किलोग्राम पहुंच गया। आंतें संक्रमित हो गईं, जिससे मुरादाबाद में ऑपरेशन के 20 दिन बाद हालत बिगड़ी। परिजनों ने दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया, लेकिन रविवार को हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।



शहर के स्कूल-कॉलेजों के आसपास जंक फूड की दुकानों का जाल बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। रामगंगा विहार के एमआईटी कॉलेज, चटोरी गली, गुरहट्टी रोड, ताड़ीखाना, बुधबाजार, हरथला, दीवान बाजार, गांधीनगर और गोकुलदास कॉलेज के पास सैकड़ों ठेले-पक्की दुकानें चाउमीन, बर्गर, मोमो, फ्रेंच फ्राइज, समोसा, पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक्स बेच रही हैं। स्कूल कैंटीनों में भी मानकों को ताक पर रखकर ये बिक रहे हैं। लंच या इंटरवल में बच्चे इन्हें खासे उत्साह से खाते हैं। जहां सख्ती है, वहां बाहर ठेले सज जाते हैं।

NFHS-5 (2019-21) के अनुसार, भारत के 5-19 वर्षीय बच्चों में मोटापा 6% से बढ़कर 19% हो गया है, जिसमें जंक फूड मुख्य वजह है। बुंदेलखंड और ग्रामीण क्षेत्रो  में भी ग्रामीण स्कूलों के पास ये दुकानें फैल रही हैं, जहां पौष्टिक भोजन की कमी पहले से है। जंक फूड से मोटापा, पाचन समस्या, कमजोरी और एकाग्रता की कमी बढ़ रही है। ठेलों पर साफ-सफाई न होने से संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। अभिभावक घर से पौष्टिक टिफिन देते हैं, लेकिन सस्ते-सवादिष्ट फास्ट फूड के आगे बच्चे टिक नहीं पाते। स्थानीय लोग प्रशासन से स्कूलों के आसपास नियंत्रण और जागरूकता की मांग कर रहे हैं।

जंक फूड: हृदय का धीमा जहर

सिद्ध अस्पताल के निदेशक व हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग मेहरोत्रा बताते हैं, "किशोरियों में हार्ट अटैक के कारण फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया या जंक फूड से ट्रांस फैट जमा होना हो सकता है। ICMR के अनुसार, भारत में 28% हृदय रोग जंक फूड के ट्रांस फैट-सोडियम से जुड़े हैं। लगातार सेवन से हृदय मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं।"

डायटीशियन डॉ. अमिषा सिंह कहती हैं, "जंक फूड में मैदा, नूडल्स, चटनी-विनेगर लो-ग्रेड के होते हैं। 3-4 साल के सेवन से लिवर-आंत क्षतिग्रस्त होते हैं, अल्सर और मल्टी-ऑर्गन फेलियर होता है। फाइबर शून्य होने से कब्ज और मोटापा बढ़ता है। समोसे एक ही तेल में तले जाते हैं, जो धीमा जहर बन जाता है।" डॉक्टर सलाह देते हैं: सप्ताह में एक बार से ज्यादा न दें।

एफएसडीए की लापरवाही

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (FSSAI) ठेलों की जांच में ढिलाई बरत रही है। WHO के अनुसार, भारत में 4.2 लाख मौतें खराब भोजन से सालाना होती हैं, जिनमें स्ट्रीट फूड बड़ा योगदान देता है।

क्यों आकर्षित करता है जंक फूड?

समय बचत: मिनटों में डिलीवरी।

स्वाद: ज्यादा चीनी, नमक, फैट।

उर्जा: यात्रा या देर रात के लिए त्वरित बूस्ट।

भारत में फास्ट फूड का मायाजाल: तथ्य-आधारित आंकड़े (2024-25 अपडेट)\

विषयआंकड़े/स्थितिप्रभाव का दायरास्रोत
बर्गर खपत4.42 करोड़ ऑर्डरफूड डिलीवरी ऐप्स (Zomato/Swiggy)कंपनी रिपोर्ट्स
पिज्जा क्रेज4.01 करोड़ ऑर्डरदो बड़े ऐप्सकंपनी डेटा
छात्रों की भागीदारी72.4% छात्र नियमित उपभोक्तादेशव्यापी सर्वेICMR-NIN अध्ययन
सेवन आवृत्ति66% सप्ताह में 1+ बारशहरी युवाNFHS-5
बाजार आकार₹3.04 लाख करोड़2025 तकStatista

चेतावनी: प्लेट में स्वाद, जेब में बीमारी!

स्वास्थ्य संकेतकआंकड़ों की भयावहतामुख्य कारणस्रोत
सालाना मौतें4.2 लाखखराब गुणवत्ता वाला भोजनWHO 2024
हृदय रोग28% मौतेंट्रांस फैट-सोडियमICMR
बीमारियां56.4% मामलों का आधारमैदा-तेल-चीनी-नमकNFHS-5
डायबिटीज10.1 करोड़ मरीजअल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूडIDF 2024
बचपन का मोटापा2.7 करोड़ बच्चे (2030 तक)जंक फूड से गंभीर रोग जोखिमUNICEF-WHO

निष्कर्ष: अहाना की मौत चेतावनी है। माता-पिता जागें, प्रशासन सख्ती बरते। स्वस्थ भोजन से ही नौनिहाल सुरक्षित रहेंगे!

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